भारत को अपनी 15वीं लोकसभा की सूरत मील गयी , सुंदर बलवान टीकायु और कुशल नेत्र्तिव वाली सरकार ! पूरे तीन महीने चले इंडियन
महा ड्रामा ने 16 मई को आख़िरी साँस ले ली ! कर्तव्य पे अधिकार की विजय भारत के लिए कोई नयी बात नही है , अब तो सनम आदत सी हो गयी है! गैर कॉंग्रेसी सरकार बनाने के सारे सपनो पे जनता ने बुलडोज़र चला दिया , यही तो लोकतंत्र है भइया .........................................
जनता ही तो जनार्दन है , क्या ये सच में लोकतंत्र की सरकार है ? लगभग 75 करोड़ जनता जिसके पास मताधिकार है और इसकी आधी आबादी तो मत का प्रयोग ही नही करती ! लगभग 125 करोड़ के होने को आये हम , चुनाव के दिन घर पे छूटी मनाने से देश की तकदीर नही बदलेगी , सोचिए ज़रा क्या ये सच में लोकतंत्र की जीत है ! जनता के नुम्मयेन्दिगी करने वाले कब तक हमारे हक को अपनी जागीर समझते रहेंगे ? एक बेईमान नेता को चुनाव प्रचार के समय बोलता सुना ....तख्त बदल देंगे , ताज बदल देंगे , बेईमआनो का राज बदल देंगे! नेता जी पिछले दो चुनाओ से जीत रहे थे, जीत कर गये जो प्रभू अब आये हैं , विनती कैसे करूँ आपसे प्रभू आपके सेक्यूरिटी वाले आपकी सुरक्षा का हवाला देते हैं , नीर भी आँखो का अब सुख गया है ,
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