Tuesday, 1 March 2011

आम बजट


प्रणव दा ने आख़िर अपने नीयत समय पे अपना चौका लगा ही दिया ! ये उनके द्वारा पेश चौथा बजट था ,  
कहीं से एक बात आयी कोई सस्ती पब्लिसिटी ना ले , आख़िर बजट तो आम आदमी का है इसमे सूपरमेन वाली बात क्यों ढुंडी जाए !  

Monday, 28 February 2011

अहोभाग्य हमारे , जो प्रभू आप पधारे !

भारत को अपनी 15वीं लोकसभा की सूरत मील गयी , सुंदर बलवान टीकायु और कुशल नेत्र्तिव वाली सरकार ! पूरे तीन महीने चले इंडियन 
महा ड्रामा ने 16 मई को आख़िरी साँस ले ली ! कर्तव्य पे अधिकार की विजय भारत के लिए कोई नयी बात नही है , अब तो सनम आदत  सी हो गयी है! गैर कॉंग्रेसी सरकार बनाने के सारे सपनो पे जनता ने बुलडोज़र चला दिया , यही तो लोकतंत्र है भइया ......................................... 
जनता ही तो जनार्दन है , क्या ये सच में लोकतंत्र की सरकार है ? लगभग 75 करोड़ जनता जिसके पास मताधिकार है और इसकी आधी आबादी तो मत का प्रयोग ही नही करती ! लगभग 125 करोड़ के होने को आये  हम , चुनाव के दिन घर पे छूटी मनाने से देश की तकदीर नही बदलेगी , सोचिए ज़रा क्या ये सच में लोकतंत्र की जीत है ! जनता के नुम्मयेन्दिगी करने वाले कब तक हमारे हक को अपनी जागीर समझते रहेंगे  ? एक बेईमान नेता को चुनाव प्रचार के समय बोलता सुना ....तख्त बदल देंगे , ताज बदल देंगे , बेईमआनो का राज बदल देंगे! नेता जी पिछले दो चुनाओ से जीत रहे थे, जीत कर गये जो प्रभू अब आये हैं , विनती कैसे  करूँ आपसे प्रभू आपके सेक्यूरिटी वाले आपकी सुरक्षा का हवाला देते हैं , नीर भी आँखो का अब सुख गया है ,